POST

लिख लो दर्द कितना भी, सब मज़ाक ही समझेंगे, *दो टूटे दिल की लाशों को बस राख ही समझेंगे!!* हम रो भी दें तो दुनिया को तमाशा ही लगेगा, *भीगी हुई पलकों को बस बरसात ही समझेंगे!!* जो जख्म दिल में पलते हैं, दिखते कहाँ किसी को, *हमारी इस खामोशी को लोग आदत ही समझेंगे!!* हमने तो मोहब्बत में खुद को ही मिटा डाला, *वो मेरी इस बर्बादी को बस गलती ही समझेंगे!!* जिसे चाहा था दिल से वही छोड़कर चला गया, *लोग इस टूटे रिश्ते को बस किस्मत ही समझेंगे!!* जब थक के एक दिन हम भी दुनिया से दूर होंगे, *लोग हमारी यादों को बस कहानी ही समझेंगे!!*

By @sd2979142 · 2 May 2026

लिख लो दर्द कितना भी, सब मज़ाक ही समझेंगे, *दो टूटे दिल की लाशों को बस राख ही समझेंगे!!* हम रो भी दें तो दुनिया को तमाशा ही लगेगा, *भीगी हुई पलकों को बस बरसात ही समझेंगे!!* जो जख्म दिल में पलते हैं, दिखते कहाँ किसी को, *हमारी इस खामोशी को लोग आदत ही समझेंगे!!* हमने तो मोहब्बत में खुद को ही मिटा डाला, *वो मेरी इस बर्बादी को बस गलती ही समझेंगे!!* जिसे चाहा था दिल से वही छोड़कर चला गया, *लोग इस टूटे रिश्ते को बस किस्मत ही समझेंगे!!* जब थक के एक दिन हम भी दुनिया से दूर होंगे, *लोग हमारी यादों को बस कहानी ही समझेंगे!!*

10 likes · 0 comments

Comments

Comments are auth-gated for guests.
लिख लो दर्द कितना भी, सब मज़ाक ही समझेंगे, *दो टूटे दिल की लाशों... | Dialogbaaz